CET 2026 Polity Classes | राष्ट्रपति (President) | CET 12th & Graduation Level | Indian Polity #07
Summary
यह वीडियो भारत के राष्ट्रपति के पद, शक्तियों और निर्वाचन प्रक्रिया की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करता है। इसमें भारतीय संविधान के भाग V (अनुच्छेद 52-151) के तहत केंद्र सरकार को समझाया गया है, जिसमें कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका का उल्लेख है। राष्ट्रपति पद के प्रावधान (अनुच्छेद 52), संघ की कार्यपालिका शक्तियां (अनुच्छेद 53), निर्वाचक मंडल (अनुच्छेद 54), निर्वाचन की प्रक्रिया (अनुच्छेद 55), पदावधि (अनुच्छेद 56), पुनर्निर्वाचन की योग्यता (अनुच्छेद 57), पद की योग्यताएं (अनुच्छेद 58), पद की शर्तें (अनुच्छेद 59), शपथ (अनुच्छेद 60), महाभियोग की प्रक्रिया (अनुच्छेद 61), और पद रिक्ति (अनुच्छेद 62) जैसे महत्वपूर्ण अनुच्छेदों पर विस्तार से चर्चा की गई है। प्रत्येक अनुच्छेद से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य और विवरण स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किए गए हैं।
Key Insights
राष्ट्रपति को संवैधानिक या नाममात्र का मुखिया कहा जाता है।
राष्ट्रपति भारत की कार्यपालिका का संवैधानिक या नाममात्र का मुखिया होता है। वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती हैं, लेकिन सभी कार्य राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं।
अनुच्छेद 53: संघ की समस्त कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित होंगी।
अनुच्छेद 53 के अनुसार, संघ की सभी कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित होती हैं। राष्ट्रपति इन शक्तियों का प्रयोग स्वयं या अपने अधीनस्थों के माध्यम से कर सकता है। राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति भी होता है।
अनुच्छेद 61: महाभियोग की प्रक्रिया।
राष्ट्रपति पर संविधान के अतिक्रमण के आरोप में महाभियोग चलाया जा सकता है। यह प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में प्रारंभ की जा सकती है। प्रस्ताव को प्रारंभ करने हेतु सदन के 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं, और राष्ट्रपति को 14 दिन पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। यदि एक सदन विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे, तो दूसरा सदन उसकी जांच करता है। यदि दूसरा सदन भी विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे, तो राष्ट्रपति को पद से हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया को अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया कहा जाता है।
Sections
केंद्र सरकार और संविधान का भाग V
केंद्र सरकार संविधान के भाग V (अनुच्छेद 52-151) में वर्णित है, जिसमें कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका शामिल हैं।
केंद्र सरकार को समझने के लिए संविधान के भाग V का अध्ययन करना आवश्यक है, जो अनुच्छेद 52 से 151 तक विस्तृत है। इस भाग को मुख्य रूप से तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है: कार्यपालिका (अनुच्छेद 52-78), व्यवस्थापिका (अनुच्छेद 79-122), और न्यायपालिका (अनुच्छेद 124-147)। अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति के अध्यादेश से संबंधित है, और नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) का प्रावधान अनुच्छेद 148-151 में है।
कार्यपालिका में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद शामिल हैं।
केंद्र सरकार की कार्यपालिका के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उनके नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद का अध्ययन किया जाता है। यह इकाई देश के प्रशासनिक कार्यों को संचालित करती है।
व्यवस्थापिका में संसद (लोकसभा और राज्यसभा) शामिल है।
व्यवस्थापिका का अर्थ है कानून निर्माण की संस्था, जिसे भारत में संसद के रूप में जाना जाता है। संसद दो सदनों - लोकसभा और राज्यसभा - से मिलकर बनी है।
न्यायपालिका में सर्वोच्च न्यायालय का प्रावधान है।
न्यायपालिका का कार्य कानूनों की व्याख्या करना और न्याय प्रदान करना है। भारत की न्यायपालिका के शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय स्थित है, जिसका प्रावधान अनुच्छेद 124 से 147 के बीच किया गया है।
राष्ट्रपति को संवैधानिक या नाममात्र का मुखिया कहा जाता है।
राष्ट्रपति भारत की कार्यपालिका का संवैधानिक या नाममात्र का मुखिया होता है। वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती हैं, लेकिन सभी कार्य राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं।
राष्ट्रपति का पद: अनुच्छेद 52 और 53
अनुच्छेद 52: भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
अनुच्छेद 52 स्पष्ट रूप से प्रावधान करता है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा। यह पद के अस्तित्व का प्रारंभिक बिंदु है।
अनुच्छेद 53: संघ की समस्त कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित होंगी।
अनुच्छेद 53 के अनुसार, संघ की सभी कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित होती हैं। राष्ट्रपति इन शक्तियों का प्रयोग स्वयं या अपने अधीनस्थों के माध्यम से कर सकता है। राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति भी होता है।
राष्ट्रपति का निर्वाचन: अनुच्छेद 54 और 55
अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल।
राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के सदस्य भी 70वें संविधान संशोधन (1992) के बाद शामिल किए गए हैं।
संसद के मनोनीत सदस्य और राज्य विधानमंडल के सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते।
संसद के मनोनीत सदस्य (जैसे राज्यसभा के 12 सदस्य) और राज्य विधानमंडल के सदस्य (विधान परिषद के सदस्य और राज्यपाल) राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेते हैं।
अनुच्छेद 55: निर्वाचन की रीति - आनुपातिक प्रतिनिधित्व एकल संक्रमणीय मत प्रणाली।
राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा होता है। इस प्रणाली में, मतदाता अपनी वरीयता के अनुसार उम्मीदवारों को मत देते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि चयनित राष्ट्रपति को बहुमत का समर्थन प्राप्त हो।
विधायक और सांसद के मत का मूल्य अलग-अलग निर्धारित होता है।
राष्ट्रपति के चुनाव में प्रत्येक विधायक (MLA) और सांसद (MP) के मत का मूल्य अलग-अलग होता है, जिसे राज्य की जनसंख्या (1971 के अनुसार) और विधायकों की संख्या (MLA वोट वैल्यू) तथा सभी विधायकों के मत मूल्यों का योग और निर्वाचित सांसदों की संख्या (MP वोट वैल्यू) के आधार पर तय किया जाता है।
उत्तर प्रदेश का विधायक सर्वाधिक मत मूल्य रखता है, जबकि सिक्किम का न्यूनतम।
राष्ट्रपति चुनाव में, उत्तर प्रदेश के एक विधायक का मत मूल्य सर्वाधिक (208) होता है, जबकि सिक्किम के एक विधायक का मत मूल्य न्यूनतम (7) होता है। एक सांसद का मत मूल्य 700 होता है।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए 50 प्रस्तावक, 50 अनुमोदक और ₹15,000 की जमानत राशि आवश्यक है।
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए चुनाव में खड़े होने के लिए 50 मतदाताओं का प्रस्तावक और 50 मतदाताओं का अनुमोदक होना अनिवार्य है। साथ ही, ₹15,000 की जमानत राशि जमा करनी होती है।
राष्ट्रपति की पदावधि और उत्तरदायित्व: अनुच्छेद 56 और 57
अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति की पदावधि।
राष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से सामान्यतः 5 वर्ष का होता है। वह तब तक पद पर बने रहता है जब तक उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण नहीं कर लेता। राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को संबोधित करके देता है, जिसकी सूचना उपराष्ट्रपति लोकसभा अध्यक्ष को देता है।
राष्ट्रपति को महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है।
संविधान का अतिक्रमण या उल्लंघन करने पर राष्ट्रपति को महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है, जिसका उल्लेख अनुच्छेद 61 में है।
अनुच्छेद 57: पुनर्निर्वाचन हेतु योग्यता।
कोई भी व्यक्ति, जो राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हो चुका है, वह कितनी भी बार पुनः निर्वाचित हो सकता है। आज तक केवल डॉ. राजेंद्र प्रसाद ही एकमात्र राष्ट्रपति हुए हैं जिन्होंने दो बार पद ग्रहण किया।
राष्ट्रपति पद के लिए योग्यताएं और शर्तें: अनुच्छेद 58 और 59
अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति पद के लिए योग्यताएं।
राष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना, 35 वर्ष की आयु पूर्ण करना और लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखना अनिवार्य है।
अनुच्छेद 59: राष्ट्रपति पद की शर्तें।
संसद या राज्य विधानमंडल का कोई सदस्य राष्ट्रपति नहीं बन सकता; यदि बनता है तो पद ग्रहण करते ही उसका पूर्व पद स्वतः रिक्त हो जाता है। राष्ट्रपति पदावधि के दौरान कोई लाभ का पद धारण नहीं कर सकता। संविधान में लाभ के पद की स्पष्ट परिभाषा नहीं है। राष्ट्रपति के विशेषाधिकारों, उपलब्धियों और वेतन-भत्तों में पदावधि के दौरान कोई कटौती या अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता। राष्ट्रपति का मासिक वेतन ₹5 लाख है, जो भारत की संचित निधि से दिया जाता है।
राष्ट्रपति की शपथ और महाभियोग: अनुच्छेद 60 और 61
अनुच्छेद 60: राष्ट्रपति पद की शपथ।
राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नियुक्त किसी वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा शपथ दिलाई जाती है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल की शपथ का प्रारूप संविधान की अनुसूची तीन में नहीं है, बल्कि उनके संबंधित अनुच्छेदों (राष्ट्रपति - 60, उपराष्ट्रपति - 69, राज्यपाल - 159) में वर्णित है।
अनुच्छेद 61: महाभियोग की प्रक्रिया।
राष्ट्रपति पर संविधान के अतिक्रमण के आरोप में महाभियोग चलाया जा सकता है। यह प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में प्रारंभ की जा सकती है। प्रस्ताव को प्रारंभ करने हेतु सदन के 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं, और राष्ट्रपति को 14 दिन पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। यदि एक सदन विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे, तो दूसरा सदन उसकी जांच करता है। यदि दूसरा सदन भी विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे, तो राष्ट्रपति को पद से हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया को अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया कहा जाता है।
राष्ट्रपति की पद रिक्ति: अनुच्छेद 62
अनुच्छेद 62: राष्ट्रपति की पद रिक्ति के संबंध में प्रावधान।
राष्ट्रपति का पद सामान्य रिक्ति (कार्यकाल समाप्ति) या आकस्मिक रिक्ति (मृत्यु, त्यागपत्र, या कार्य करने में असमर्थता) के कारण रिक्त हो सकता है। सामान्य रिक्ति होने पर कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व नए राष्ट्रपति का चुनाव करा लिया जाता है। आकस्मिक रिक्ति की स्थिति में, 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है। इस अवधि में उपराष्ट्रपति (या उनके अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश) कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं।
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Past Questions
Structure of Central Government
The Constitution's Part V covers the Central Government, specifically Articles 52 to 151.
The Central Government is explained through Part V of the Indian Constitution, which spans from Article 52 to Article 151.
Part V is divided into five chapters: Executive, Legislature, Special Provisions, Comptroller and Auditor-General, and Miscellaneous.
Part V of the Constitution is categorized into five chapters, dealing with the Executive, Legislature, Special Provisions, the Comptroller and Auditor-General, and miscellaneous topics.
Branches of Government and Their Articles
The Executive branch is covered by Articles 52 to 78.
The Executive branch of the Central Government is detailed in Articles 52 to 78 of the Constitution.
The Legislature (Parliament) is covered by Articles 79 to 122.
The legislative powers and structure, primarily concerning Parliament, are outlined in Articles 79 to 122.
Special Provisions, including the President's Ordinance power, are found in Article 123.
Article 123 specifically addresses the President's power to issue ordinances, which falls under special provisions.
The Judiciary (Supreme Court) is covered by Articles 124 to 147.
The judicial branch, specifically the Supreme Court, is detailed in Articles 124 to 147.
The Comptroller and Auditor-General (CAG) is covered by Articles 148 to 151.
The role and functions of the Comptroller and Auditor-General of India are specified in Articles 148 to 151.
Executive Branch Details
The Executive branch includes the President, Vice-President, Prime Minister, and the Council of Ministers.
The Executive, as defined in Articles 52-78, comprises the President, the Vice-President, the Prime Minister, and the Prime Minister's Council of Ministers.
Legislature Details
The Legislature, or Parliament, consists of the Lok Sabha and the Rajya Sabha.
The Legislature, as outlined in Articles 79-122, is Parliament, which is bicameral, consisting of the Lok Sabha and the Rajya Sabha.











