Breathing & Exchange of Gases | Full Chapter in ONE SHOT | Chapter 14 | Class 11 Biology 🔥
Summary
यह वीडियो श्वसन की परिभाषा, प्रक्रियाओं और मानव श्वसन प्रणाली की विस्तृत व्याख्या प्रदान करता है। इसमें ब्रीदिंग, बाहरी और आंतरिक श्वसन, और कोशिकीय श्वसन जैसे चरणों को शामिल किया गया है। मानव श्वसन पथ, श्वसन अंगों, श्वसन तंत्र की संरचना, और ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन पर भी चर्चा की गई है। वीडियो में श्वसन के तंत्र, फेफड़ों की क्षमताएं, और अस्थमा, वातस्फीति, और व्यावसायिक श्वसन संबंधी विकारों जैसे श्वसन संबंधी विकारों को भी कवर किया गया है।
Key Insights
श्वसन केवल सांस लेना और छोड़ना नहीं है, बल्कि ऊर्जा उत्पादन के लिए भोजन का विघटन है।
श्वसन को साँस लेने और छोड़ने से कहीं बढ़कर ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ऑक्सीजन की मदद से भोजन (ग्लूकोज) को तोड़ने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और एटीपी (ऊर्जा) उत्पन्न होती है।
साँस लेने (Inhalation) के दौरान, डायाफ्राम नीचे की ओर और पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर बढ़ती हैं, जिससे वक्ष गुहा का आयतन बढ़ता है।
सांस लेने के लिए, डायाफ्राम सिकुड़ता है और नीचे की ओर चपटा हो जाता है। बाह्य इंटरकोस्टल मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, जिससे पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर खिंचती हैं। इससे वक्ष गुहा का आयतन बढ़ जाता है, फेफड़ों में दबाव कम होता है, और हवा अंदर आती है।
साँस छोड़ने (Exhalation) के दौरान, डायाफ्राम ऊपर की ओर और पसलियाँ नीचे और अंदर की ओर आती हैं, जिससे वक्ष गुहा का आयतन कम होता है।
सांस छोड़ने के लिए, डायाफ्राम शिथिल (relax) होता है और ऊपर की ओर वापस गुंबद के आकार में आ जाता है। आंतरिक इंटरकोस्टल मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, जिससे पसलियाँ नीचे और अंदर की ओर आती हैं। इससे वक्ष गुहा का आयतन कम हो जाता है, फेफड़ों में दबाव बढ़ता है, और हवा बाहर निकलती है।
अवशिष्ट आयतन (RV) बलपूर्वक साँस छोड़ने के बाद भी फेफड़ों में बची हवा की मात्रा है।
अवशिष्ट आयतन (RV) वह हवा की मात्रा है जो फेफड़ों में बलपूर्वक साँस छोड़ने के बाद भी हमेशा बनी रहती है (लगभग 1100-1200 एमएल), जो फेफड़ों को ढहने से रोकती है।
विनिमय झिल्ली (diffusion membrane) की मोटाई, आंशिक दबाव और गैसों की घुलनशीलता विनिमय को प्रभावित करते हैं।
गैसों के आदान-प्रदान की दर तीन मुख्य कारकों पर निर्भर करती है: विनिमय झिल्ली की मोटाई, गैसों का आंशिक दबाव, और गैसों की घुलनशीलता। कार्बन डाइऑक्साइड ऑक्सीजन की तुलना में 20-25 गुना अधिक घुलनशील है।
लगभग 70% CO2 का परिवहन बाइकार्बोनेट आयनों के रूप में होता है, जो विनिमय के लिए अत्यधिक घुलनशील होते हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड का अधिकांश भाग (लगभग 70%) लाल रक्त कोशिकाओं में कार्बोनी एनहाइड्रेज एंजाइम की मदद से बाइकार्बोनेट आयनों में परिवर्तित होकर ले जाया जाता है। यह रूप CO2 के परिवहन के लिए अधिक कुशल है।
मस्तिष्क का मेडुला (Medulla) श्वसन की लय को नियंत्रित करता है।
मस्तिष्क में स्थित श्वसन लय केंद्र (Respiratory Rhythm Centre) मुख्य रूप से मेडुला में होता है और यह श्वसन की अंतर्निहित लय को उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार होता है।
CO2 और H+ आयनों की सांद्रता में वृद्धि श्वसन दर को बढ़ाती है, जिन्हें कीमोरिसेप्टर्स संवेदित करते हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और हाइड्रोजन आयनों (H+) की सांद्रता में वृद्धि श्वसन को उत्तेजित करती है। मस्तिष्क स्टेम में स्थित सेंट्रल कीमोरिसेप्टर्स और कैरोटिड तथा एओर्टिक बॉडीज में स्थित पेरिफेरल कीमोरिसेप्टर्स इन परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील होते हैं।
Sections
श्वसन की परिभाषा और प्रक्रिया
श्वसन केवल सांस लेना और छोड़ना नहीं है, बल्कि ऊर्जा उत्पादन के लिए भोजन का विघटन है।
श्वसन को साँस लेने और छोड़ने से कहीं बढ़कर ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ऑक्सीजन की मदद से भोजन (ग्लूकोज) को तोड़ने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और एटीपी (ऊर्जा) उत्पन्न होती है।
श्वसन एक फिजियो-केमिकल प्रक्रिया है और ब्रीदिंग इसका एक हिस्सा है।
श्वसन को एक फिजियो-केमिकल प्रक्रिया माना जाता है। सामान्य साँस लेने और छोड़ने की क्रिया को ब्रीदिंग कहा जाता है, जो श्वसन का एक प्रमुख चरण है।
श्वसन के पाँच प्रमुख चरण हैं: ब्रीदिंग, बाहरी श्वसन, आंतरिक श्वसन, गैसों का आदान-प्रदान, और कोशिकीय श्वसन।
श्वसन की समग्र प्रक्रिया में पाँच प्रमुख चरण शामिल हैं: 1. ब्रीदिंग (साँस लेना और छोड़ना), 2. बाहरी श्वसन (फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं के बीच गैसों का आदान-प्रदान), 3. आंतरिक श्वसन (रक्त वाहिकाओं और शरीर के ऊतकों के बीच गैसों का आदान-प्रदान), 4. गैसों का आदान-प्रदान (संपूर्ण विनिमय प्रक्रिया), और 5. कोशिकीय श्वसन (कोशिकाओं के भीतर ऊर्जा उत्पादन)।
श्वसन अंग और विभिन्न जीव
जलीय जीव गलफड़ों (gills) के माध्यम से श्वसन करते हैं, जिसे ब्रेकियल श्वसन कहते हैं।
पानी में रहने वाले जीव, जैसे मछलियाँ, गलफड़ों का उपयोग करके श्वसन करती हैं, जिसे ब्रेकियल श्वसन के रूप में जाना जाता है।
स्थलीय जीव मुख्य रूप से फेफड़ों से श्वसन करते हैं, जिसे पल्मोनरी श्वसन कहा जाता है।
भूमि पर रहने वाले जीव, जैसे स्तनधारी, फेफड़ों का उपयोग करके श्वसन करते हैं, जो पल्मोनरी श्वसन के रूप में जानी जाती है।
संगठन के स्तर के आधार पर जीव शरीर की सतह, क्यूटिकल्स, बुक लंग्स, बुक गिल्स, ट्रेकिअल सिस्टम, या गलफड़ों से श्वसन करते हैं।
विभिन्न जीव अपनी संगठन के स्तर के अनुसार श्वसन के विभिन्न तरीकों का उपयोग करते हैं: पोरिफेरा, सीलेंट्रेटा, टीनोफोरा, और प्लाटीहेल्मिन्थेस शरीर की सतह से डिफ्यूजन द्वारा श्वसन करते हैं। एस्केल्मिंथेस और एनिलिडा (जैसे केंचुए) नम क्यूटिकल के माध्यम से श्वसन करते हैं। आर्थ्रोपोडा बुक लंग्स, बुक गिल्स, और ट्रेकिअल सिस्टम का उपयोग करते हैं। मोलस्का और हेमीकोर्डेटा गलफड़ों से श्वसन करते हैं। इकानोडर्मेटा ट्यूब फीट या जल संवहन प्रणाली का उपयोग करते हैं।
सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी मुख्य रूप से फेफड़ों से श्वसन करते हैं।
सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी सामान्यतः फेफड़ों के माध्यम से श्वसन करते हैं। उभयचर त्वचा, फेफड़े, या बक्को-फैरिंगल गुहा का उपयोग कर सकते हैं।
मानव श्वसन प्रणाली
मानव श्वसन पथ में नासिका छिद्रों से लेकर वायुकोष्ठिका तक की संरचनाएं शामिल हैं।
मानव श्वसन पथ नासिका छिद्रों (nostrils) से शुरू होता है, जिसके बाद नासिका गुहा (nasal cavity), ग्रसनी (pharynx), स्वरयंत्र (larynx), श्वासनली (trachea), श्वसनी (bronchi), और अंत में वायुकोष्ठिका (alveoli) तक जाता है।
नासिका गुहा हवा को गर्म, नम और फिल्टर करती है।
नासिका गुहा में मौजूद श्लेष्म (mucus) और बाल हवा को नम, गर्म करते हैं और धूल कणों व सूक्ष्मजीवों को फंसाकर फिल्टर करते हैं।
ग्रसनी (Pharynx) वायु और भोजन के लिए एक सामान्य मार्ग के रूप में कार्य करती है।
ग्रसनी, या फैरिंक्स, एक सामान्य मार्ग है जहाँ से हवा और भोजन दोनों गुजरते हैं।
स्वरयंत्र (Larynx) या वॉयस बॉक्स ध्वनि उत्पादन के लिए जिम्मेदार है और एपिग्लोटिस द्वारा ढका होता है।
स्वरयंत्र, जिसे वॉयस बॉक्स भी कहा जाता है, ध्वनि उत्पन्न करता है। एपिग्लोटिस नामक एक उपास्थि (cartilage) फ्लैप की तरह काम करता है, जो भोजन को श्वासनली में जाने से रोकता है।
श्वासनली (Trachea) 'C' आकार के उपास्थि छल्लों द्वारा समर्थित होती है और श्वसनी में विभाजित होती है।
श्वासनली, या विंडपाइप, 'C' आकार के उपास्थि छल्लों से बनी होती है जो इसे खुला रखने में मदद करते हैं। यह पाँचवीं वक्षीय कशेरुका (fifth thoracic vertebra) के स्तर पर प्राथमिक श्वसनी (primary bronchi) में विभाजित होती है।
श्वसनी का विभाजन द्वितीयक, तृतीयक श्वसनी और अंततः ब्रोन्किओल्स तक जारी रहता है।
प्राथमिक श्वसनी आगे द्वितीयक (secondary), तृतीयक (tertiary) श्वसनी और फिर प्रारंभिक श्वसनिकाओं (initial bronchioles) में विभाजित होती हैं। उपास्थि केवल प्रारंभिक श्वसनिकाओं तक ही मौजूद होती है।
वायुकोष्ठिका (Alveoli) गैस विनिमय के लिए प्राथमिक स्थल हैं और श्वसन प्रणाली की कार्यात्मक इकाई हैं।
वायुकोष्ठिका, या एल्विओली, फेफड़ों में छोटी, गुब्बारे जैसी संरचनाएं हैं जहाँ ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान होता है। ये श्वसन प्रणाली की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाइयाँ हैं।
फेफड़े प्लूरल झिल्ली से घिरे होते हैं, जिसमें प्लूरल द्रव होता है।
फेफड़े एक दोहरी झिल्ली वाली संरचना से घिरे होते हैं जिसे प्लूरा (pleura) कहा जाता है, जिसके बीच में प्लूरल द्रव (pleural fluid) होता है। यह द्रव फेफड़ों को झटके से बचाता है और घर्षण को कम करता है।
वक्ष गुहा (Thoracic cavity) पसलियों, कशेरुकाओं, उरोस्थि और डायाफ्राम से घिरी होती है।
वक्ष गुहा, जिसमें फेफड़े स्थित होते हैं, आगे की ओर उरोस्थि (sternum), पीछे की ओर कशेरुका स्तंभ (vertebral column), बगल में पसलियों (ribs) और नीचे की ओर डायाफ्राम (diaphragm) से घिरी होती है।
श्वसन पथ को कंडक्टिंग जोन (नासिका छिद्र से टर्मिनल ब्रोन्किओल तक) और रेस्पिरेटरी जोन (वायुकोष्ठिका नलिकाओं और वायुकोष्ठिकाओं) में विभाजित किया गया है।
श्वसन पथ को दो क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: कंडक्टिंग जोन, जो हवा को फेफड़ों तक ले जाता है, साफ करता है, और तापमान नियंत्रित करता है (नासिका छिद्र से टर्मिनल ब्रोन्किओल तक); और रेस्पिरेटरी जोन, जो गैस विनिमय के लिए जिम्मेदार है (वायुकोष्ठिका नलिकाओं और वायुकोष्ठिकाओं)।
श्वसन की क्रियाविधि (Mechanisms of Breathing)
हवा का प्रवाह उच्च दबाव से निम्न दबाव की ओर होता है।
हवा हमेशा उच्च वायुमंडलीय दबाव वाले क्षेत्र से निम्न वायुमंडलीय दबाव वाले क्षेत्र की ओर बहती है।
श्वसन की क्रियाविधि में डायाफ्राम और इंटरकोस्टल मांसपेशियों की समन्वित क्रिया शामिल है।
साँस लेने (inhalation) और छोड़ने (exhalation) की प्रक्रिया डायाफ्राम और आंतरिक तथा बाह्य इंटरकोस्टल मांसपेशियों के संकुचन और शिथिलन द्वारा संचालित होती है।
साँस लेने (Inhalation) के दौरान, डायाफ्राम नीचे की ओर और पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर बढ़ती हैं, जिससे वक्ष गुहा का आयतन बढ़ता है।
सांस लेने के लिए, डायाफ्राम सिकुड़ता है और नीचे की ओर चपटा हो जाता है। बाह्य इंटरकोस्टल मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, जिससे पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर खिंचती हैं। इससे वक्ष गुहा का आयतन बढ़ जाता है, फेफड़ों में दबाव कम होता है, और हवा अंदर आती है।
साँस छोड़ने (Exhalation) के दौरान, डायाफ्राम ऊपर की ओर और पसलियाँ नीचे और अंदर की ओर आती हैं, जिससे वक्ष गुहा का आयतन कम होता है।
सांस छोड़ने के लिए, डायाफ्राम शिथिल (relax) होता है और ऊपर की ओर वापस गुंबद के आकार में आ जाता है। आंतरिक इंटरकोस्टल मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, जिससे पसलियाँ नीचे और अंदर की ओर आती हैं। इससे वक्ष गुहा का आयतन कम हो जाता है, फेफड़ों में दबाव बढ़ता है, और हवा बाहर निकलती है।
श्वसन संबंधी आयतन और क्षमताएं (Respiratory Volumes and Capacities)
टाइडल वॉल्यूम (TV) सामान्य साँस लेने और छोड़ने के दौरान हवा की वह मात्रा है।
टाइडल वॉल्यूम (TV) वह हवा की मात्रा है जिसे एक व्यक्ति सामान्य रूप से साँस लेता और छोड़ता है, जो लगभग 500 एमएल होती है।
इंस्पिरेटरी रिजर्व वॉल्यूम (IRV) सामान्य साँस लेने के बाद अतिरिक्त हवा की मात्रा है जिसे बलपूर्वक अंदर लिया जा सकता है।
इंस्पिरेटरी रिजर्व वॉल्यूम (IRV) वह अतिरिक्त हवा की मात्रा है जिसे एक व्यक्ति सामान्य साँस लेने के बाद बलपूर्वक अंदर ले सकता है (लगभग 2500-3000 एमएल)।
एक्सपाइरेटरी रिजर्व वॉल्यूम (ERV) सामान्य साँस छोड़ने के बाद अतिरिक्त हवा की मात्रा है जिसे बलपूर्वक बाहर निकाला जा सकता है।
एक्सपाइरेटरी रिजर्व वॉल्यूम (ERV) वह अतिरिक्त हवा की मात्रा है जिसे एक व्यक्ति सामान्य साँस छोड़ने के बाद बलपूर्वक बाहर निकाल सकता है (लगभग 1000-1100 एमएल)।
अवशिष्ट आयतन (RV) बलपूर्वक साँस छोड़ने के बाद भी फेफड़ों में बची हवा की मात्रा है।
अवशिष्ट आयतन (RV) वह हवा की मात्रा है जो फेफड़ों में बलपूर्वक साँस छोड़ने के बाद भी हमेशा बनी रहती है (लगभग 1100-1200 एमएल), जो फेफड़ों को ढहने से रोकती है।
इंस्पिरेटरी कैपेसिटी (IC) सामान्य साँस छोड़ने के बाद अधिकतम हवा की मात्रा है जिसे अंदर लिया जा सकता है।
इंस्पिरेटरी कैपेसिटी (IC) कुल हवा की मात्रा है जिसे एक व्यक्ति सामान्य साँस छोड़ने के बाद बलपूर्वक अंदर ले सकता है। यह TV + IRV के बराबर होती है।
एक्सपाइरेटरी कैपेसिटी (EC) सामान्य साँस लेने के बाद हवा की वह मात्रा है जिसे बाहर निकाला जा सकता है।
एक्सपाइरेटरी कैपेसिटी (EC) कुल हवा की मात्रा है जिसे एक व्यक्ति सामान्य साँस लेने के बाद बलपूर्वक बाहर निकाल सकता है। यह TV + ERV के बराबर होती है।
फंक्शनल अवशिष्ट क्षमता (FRC) सामान्य साँस छोड़ने के बाद फेफड़ों में बची हवा की मात्रा है।
फंक्शनल अवशिष्ट क्षमता (FRC) सामान्य साँस छोड़ने के बाद फेफड़ों में बची हवा की मात्रा है। यह ERV + RV के बराबर होती है।
वाइटल कैपेसिटी (VC) बलपूर्वक साँस लेने के बाद अधिकतम हवा की मात्रा है जिसे बाहर निकाला जा सकता है।
वाइटल कैपेसिटी (VC) वह कुल हवा की मात्रा है जिसे एक व्यक्ति बलपूर्वक साँस लेने के बाद बाहर निकाल सकता है। यह TV + IRV + ERV के बराबर होती है।
कुल फेफड़े की क्षमता (TLC) फेफड़ों में हवा की कुल मात्रा है।
कुल फेफड़े की क्षमता (TLC) फेफड़ों में मौजूद हवा की कुल मात्रा है, जिसमें सभी आयतन (TV, IRV, ERV, RV) शामिल होते हैं। यह VC + RV के बराबर होती है।
गैसों का आदान-प्रदान (Exchange of Gases)
गैसों का आदान-प्रदान विसरण (diffusion) द्वारा आंशिक दबाव के अंतर के कारण होता है।
ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान विसरण की प्रक्रिया द्वारा होता है, जो गैसों के आंशिक दबाव (partial pressure) में अंतर के कारण होता है।
विनिमय झिल्ली (diffusion membrane) की मोटाई, आंशिक दबाव और गैसों की घुलनशीलता विनिमय को प्रभावित करते हैं।
गैसों के आदान-प्रदान की दर तीन मुख्य कारकों पर निर्भर करती है: विनिमय झिल्ली की मोटाई, गैसों का आंशिक दबाव, और गैसों की घुलनशीलता। कार्बन डाइऑक्साइड ऑक्सीजन की तुलना में 20-25 गुना अधिक घुलनशील है।
वायुकोष्ठिका (Alveoli) और फुफ्फुसीय केशिकाओं (pulmonary capillaries) के बीच ऑक्सीजन उच्च आंशिक दबाव से निम्न आंशिक दबाव में स्थानांतरित होती है।
वायुकोष्ठिका में ऑक्सीजन का आंशिक दबाव (PO2 ≈ 104 mmHg) फुफ्फुसीय केशिकाओं में ऑक्सीजन के आंशिक दबाव (PO2 ≈ 40 mmHg) से अधिक होता है, इसलिए ऑक्सीजन वायुकोष्ठिका से रक्त में विसरित होती है। कार्बन डाइऑक्साइड का विनिमय विपरीत दिशा में होता है (PCO2 ≈ 40 mmHg in alveoli vs. PCO2 ≈ 45 mmHg in capillaries)।
ऊतकों (Tissues) और सिस्टमिक केशिकाओं (systemic capillaries) के बीच, ऑक्सीजन रक्त से ऊतकों में स्थानांतरित होती है।
ऊतकों में ऑक्सीजन का आंशिक दबाव (PO2 ≈ 40 mmHg) रक्त में ऑक्सीजन के आंशिक दबाव (PO2 ≈ 95 mmHg) से कम होता है, इसलिए ऑक्सीजन रक्त से ऊतकों में विसरित होती है। ऊतकों में कार्बन डाइऑक्साइड का आंशिक दबाव (PCO2 ≈ 45 mmHg) रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड के आंशिक दबाव (PCO2 ≈ 40 mmHg) से अधिक होता है, इसलिए कार्बन डाइऑक्साइड ऊतकों से रक्त में विसरित होती है।
गैसों का परिवहन (Transport of Gases)
लगभग 97% ऑक्सीजन हीमोग्लोबिन द्वारा और 3% प्लाज्मा में घुलकर ले जाई जाती है।
ऑक्सीजन का परिवहन मुख्य रूप से हीमोग्लोबिन (लगभग 97%) द्वारा ऑक्सीहीमोग्लोबिन के रूप में और एक छोटी मात्रा (लगभग 3%) प्लाज्मा में घुलकर होती है।
प्रत्येक हीमोग्लोबिन अणु अधिकतम चार ऑक्सीजन अणुओं को बांध सकता है।
हीमोग्लोबिन अणु में चार ग्लोबिन उपइकाइयाँ होती हैं, जिनमें से प्रत्येक एक ऑक्सीजन अणु को बांध सकती है, जिससे एक हीमोग्लोबिन अणु कुल चार ऑक्सीजन अणुओं को ले जाने में सक्षम होता है।
ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन वियोजन वक्र (Oxygen-Hemoglobin Dissociation Curve) आंशिक दबाव और हीमोग्लोबिन संतृप्ति के बीच संबंध को दर्शाता है।
ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन वियोजन वक्र (Oxygen-Hemoglobin Dissociation Curve) एक सिग्मॉइड वक्र है जो दिखाता है कि ऑक्सीजन का आंशिक दबाव (PO2) और हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन संतृप्ति (percentage saturation) के बीच क्या संबंध है।
कार्बन डाइऑक्साइड तीन रूपों में ले जाई जाती है: प्लाज्मा में घुलकर, हीमोग्लोबिन से जुड़कर, और बाइकार्बोनेट आयनों के रूप में।
कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन तीन तरीकों से होता है: लगभग 7% प्लाज्मा में घुलकर, लगभग 20-25% हीमोग्लोबिन से कार्बामिनोहीमोग्लोबिन बनाकर, और सबसे अधिक (लगभग 70%) बाइकार्बोनेट आयनों (HCO3-) के रूप में।
लगभग 70% CO2 का परिवहन बाइकार्बोनेट आयनों के रूप में होता है, जो विनिमय के लिए अत्यधिक घुलनशील होते हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड का अधिकांश भाग (लगभग 70%) लाल रक्त कोशिकाओं में कार्बोनी एनहाइड्रेज एंजाइम की मदद से बाइकार्बोनेट आयनों में परिवर्तित होकर ले जाया जाता है। यह रूप CO2 के परिवहन के लिए अधिक कुशल है।
प्रति 100 मिलीलीटर ऑक्सीजन युक्त रक्त लगभग 5 मिलीलीटर ऑक्सीजन का परिवहन करता है।
सामान्य परिस्थितियों में, 100 मिलीलीटर ऑक्सीजन युक्त रक्त लगभग 5 मिलीलीटर ऑक्सीजन ऊतकों तक पहुँचाता है।
प्रति 100 मिलीलीटर ऑक्सीजन रहित रक्त लगभग 4 मिलीलीटर कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन करता है।
सामान्य परिस्थितियों में, 100 मिलीलीटर ऑक्सीजन रहित रक्त लगभग 4 मिलीलीटर कार्बन डाइऑक्साइड ऊतकों से फेफड़ों तक पहुँचाता है।
श्वसन का नियंत्रण (Regulation of Respiration)
श्वसन का नियंत्रण न्यूरल और रासायनिक तंत्रों द्वारा होता है।
श्वसन की दर और गहराई को न्यूरल (तंत्रिका तंत्र) और केमिकल (रासायनिक) दोनों तंत्रों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
मस्तिष्क का मेडुला (Medulla) श्वसन की लय को नियंत्रित करता है।
मस्तिष्क में स्थित श्वसन लय केंद्र (Respiratory Rhythm Centre) मुख्य रूप से मेडुला में होता है और यह श्वसन की अंतर्निहित लय को उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार होता है।
पॉन्स (Pons) में स्थित न्यूमोटैक्सिक केंद्र (Pneumotaxic centre) साँस लेने की अवधि को नियंत्रित करता है।
पॉन्स में स्थित न्यूमोटैक्सिक केंद्र साँस लेने की अवधि को सीमित करके श्वसन दर को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे यह इन्हैलेशन को कम करके श्वसन दर को बढ़ा सकता है।
CO2 और H+ आयनों की सांद्रता में वृद्धि श्वसन दर को बढ़ाती है, जिन्हें कीमोरिसेप्टर्स संवेदित करते हैं।
कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और हाइड्रोजन आयनों (H+) की सांद्रता में वृद्धि श्वसन को उत्तेजित करती है। मस्तिष्क स्टेम में स्थित सेंट्रल कीमोरिसेप्टर्स और कैरोटिड तथा एओर्टिक बॉडीज में स्थित पेरिफेरल कीमोरिसेप्टर्स इन परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील होते हैं।
श्वसन संबंधी विकार (Respiratory Disorders)
अस्थमा (Asthma) वायुमार्गों की सूजन और संकुचन के कारण सांस लेने में कठिनाई का कारण बनता है।
अस्थमा एक एलर्जी संबंधी विकार है जिसमें वायुमार्ग (brochi और bronchioles) सूज जाते हैं और सिकुड़ जाते हैं (smooth muscle spasm), जिससे सांस लेने में कठिनाई और घरघराहट (wheezing) होती है।
वातस्फीति (Emphysema) वायुकोष्ठिकाओं (alveoli) की दीवारें क्षतिग्रस्त होने से होती है, जो मुख्य रूप से धूम्रपान के कारण होती है।
वातस्फीति एक ऐसी स्थिति है जिसमें वायुकोष्ठिकाओं की दीवारें नष्ट हो जाती हैं, जिससे गैस विनिमय के लिए सतह क्षेत्र कम हो जाता है। यह मुख्य रूप से लंबे समय तक धूम्रपान के कारण होता है।
व्यावसायिक श्वसन संबंधी विकार (Occupational Respiratory Disorders) धूल और कणों के साँस लेने के कारण होते हैं, जिससे फेफड़ों में फाइब्रोसिस होता है।
कुछ उद्योगों (जैसे खदानों, पत्थर तोड़ने वाली फैक्ट्रियों) में काम करने वाले लोग सिलिका, धूल या अन्य कणों को साँस लेने से फेफड़ों में फाइब्रोसिस (fibrosis) विकसित कर सकते हैं, जिससे श्वसन संबंधी समस्याएँ होती हैं।
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Past Questions
Lungs and Their Protection
The lungs are protected by a double membrane called the pleura, which contains pleural fluid.
The lungs are enclosed within a protective double membrane known as the pleura. Between the layers of the pleura, there is a fluid called pleural fluid, which acts as a shock absorber and reduces friction.
The left lung has a cardiac notch that deviates medially.
The left lung exhibits a specific feature called the cardiac notch, which is an indentation that angles medially.
The Diaphragm
The diaphragm is a dome-shaped muscle located below the lungs.
Beneath the lungs is a significant structure called the diaphragm. It is a muscle with a dome-like shape.
The diaphragm moves during inhalation and exhalation, playing a role in breathing.
This muscle is crucial for the process of breathing as it undergoes movement during inhalation and exhalation.
تعارف اور اہم نکات
انسانی فزیولوجی کی اہمیت اور اسباب
یہ ویڈیو انسانی فزیولوجی، خاص طور پر سانس لینے اور گیسوں کے تبادلے کے باب کا تعارف کراتی ہے۔ اس میں بتایا گیا ہے کہ انسانی فزیولوجی، چاہے اسکول کے امتحانات ہوں یا NEET، ایک اہم موضوع ہے۔
طبیعیات، کیمسٹری اور ریاضی کی اہمیت
طبیعیات، کیمسٹری اور ریاضی کو کمزور سمجھنے کے باوجود، بایولوجی کے طلباء کے لیے ان مضامین کی اہمیت کو اجاگر کیا گیا ہے۔
لیکچر کا طریقہ کار اور نوٹس کی اہمیت
لیکچر کو مکمل دیکھنے، ساتھ ساتھ نوٹس بنانے، این سی آر ٹی پڑھنے اور سوالات حل کرنے کی ترغیب دی گئی ہے۔
سانس لینا (Breathing) بمقابلہ ریسپیرییشن (Respiration)
سانس لینے کی عام غلط فہمی
بہت سے لوگ سانس لینے اور چھوڑنے کو ہی ریسپیرییشن سمجھتے ہیں، لیکن یہ صرف بریمنگ ہے۔
ریسپیرییشن کی صحیح تعریف:
ریسپیرییشن وہ عمل ہے جس میں آکسیجن کی مدد سے خوراک (گلوکوز) کو توڑ کر توانائی (ATP) پیدا کی جاتی ہے۔ فارمولا: C6H12O6 + O2 → H2O + CO2 + ATP
ریسپیرییشن کی نوعیت
ریسپیرییشن ایک فزیو کیمیکل (Physio-chemical) عمل ہے۔
ریسپیرییشن کے مراحل
مرحلہ 1: بریمنگ (Breathing)
ہوا کا اندر لینا (Inhalation/Inspiration) اور باہر چھوڑنا (Exhalation/Expiration)۔
مرحلہ 2: بیرونی ریسپیرییشن (External Respiration)
پھیپھڑوں (Alveoli) اور خون کی نالیوں (Blood Vessels) کے درمیان گیسوں کا تبادلہ (O2 اور CO2)۔
مرحلہ 3: اندرونی ریسپیرییشن (Internal Respiration)
خون کی نالیوں اور جسم کے خلیات (Tissues) کے درمیان گیسوں کا تبادلہ۔
مرحلہ 4: گیسوں کا تبادلہ (Exchange of Gases)
یہ بیرونی اور اندرونی ریسپیرییشن کا مجموعی عمل ہے۔
مرحلہ 5: سیلولر ریسپیرییشن (Cellular Respiration)
خلیات کے اندر آکسیجن کی مدد سے گلوکوز کا ٹوٹنا اور توانائی پیدا ہونا۔
سانس لینے کے اعضاء (Respiratory Organs)
جلدی سانس (Cutaneous Respiration)
جلد کے ذریعے سانس لینا، جیسے کیڑے مکوڑے کرتے ہیں۔
برینکیال ریسپیرییشن (Branchial Respiration)
گلز (Gills) کے ذریعے پانی میں سانس لینا (مچھلیوں میں عام)۔
پلمونری ریسپیرییشن (Pulmonary Respiration)
پھیپھڑوں (Lungs) کے ذریعے ہوا میں سانس لینا۔
تنظیم کی سطح کے مطابق سانس
خلیاتی سطح (Cellular Level):
پوریفیرا، سيلينٹریٹا، ٹينوفورا، پλάٹی ہیلمینتھس، ایسک헬مينتھس (جسم کی سطح سے پھیلاؤ کے ذریعے)۔
اعضاء کی سطح (Organ Level):
اینلیڈا (نمی والی کیوٹیکل کے ذریعے)، آرتھروپوڈا ( بک لنگز، بک گلز، ٹريڪل سسٹم)، مولسکا (گلز)، ایکائنوڈرمیٹا (پانی کی نالیوں کا نظام)۔
اعضاء کا نظام (Organ System Level):
مچھلیاں (گلز)، ایمفیبینز (جلد، پھیپھڑے، بکل کیویٹی)، ريپٹائلز، پرندے، ممالیہ (پھیپھڑے)۔
انسانی نظام تنفس (Human Respiratory System)
راستہ
نوسٹرلز (ناک کے سوراخ) → نیسل کیویٹی (ناک کی گہا) → انٹرنل نوسٹرلز → فیرنکس (گلے کا مشترکہ حصہ) → لیرنکس (صوتی باکس) → ٹريڪيا (سانس کی نالی) → پرائمری، سیکنڈری، ٹرشری برونکس → انیشیل برونکیول → ٹرمینل برونکیول → ایلوولر ڈکٹ → ایلوولی (پھیپھڑوں کے تھیلے)۔
نوسٹرلز (Nostrils):
ہوا کا اندر اور باہر جانا۔
نیسل کیویٹی (Nasal Cavity):
ہوا کو نمی بخشنا، فلٹر کرنا (بال اور میوکس کی مدد سے)۔
فیرنکس (Pharynx):
ہوا اور خوراک دونوں کے لیے مشترکہ راستہ۔
لیرنکس (Larynx):
صوتی باکس (Voice Box)، آواز پیدا کرتا ہے۔ ایپیگلوٹس (Epiglottis) نامی کارٹلیج خوراک کو سانس کی نالی میں جانے سے روکتا ہے۔
ٹریچیا (Trachea):
سانس کی نالی، سی-شپ کارٹلیج سے بنی ہوتی ہے (ڈورسل سائیڈ پر آدھی کھلی)۔
برونکس اور برونکیول (Bronchus and Bronchioles):
ٹریچیا تقسیم ہو کر برونکیول بناتی ہے، جن میں کارٹلیج صرف انیشیل برونکیول تک ہوتا ہے۔
ایلوولی (Alveoli):
پھیپھڑوں کی تھیلیاں، گیسوں کے تبادلے کا بنیادی مقام (فنکشنل اور اسٹرکچرل یونٹ)۔
سينے کی گہا (Thoracic Cavity) اور پھیپھڑوں کی حفاظت
ڈایافرام (Diaphragm):
ایک گنبد نما پٹھہ جو سینے کی گہا کے نیچے ہوتا ہے اور سانس لینے میں مدد دیتا ہے۔
پسلیاں، اسٹرنم، ورٹیبرل کالم:
پھیپھڑوں کو گردن (Ventally)، ریڑھ کی ہڈی (Dorsally) اور پسلیوں (Laterally) سے تحفظ فراہم کرتے ہیں۔
پلورا (Pleura):
پھیپھڑوں کے گرد دوہری جھلی ہوتی ہے۔ بیرونی جھلی کو پیرائیٹل پلورا اور اندرونی کو وسرل پلورا کہتے ہیں۔
پلورل فلوئڈ (Pleural Fluid):
دونوں جھلیوں کے درمیان موجود سیال جو رگڑ کم کرتا ہے اور جھٹکوں سے بچاتا ہے۔
کارڈیک نوچ (Cardiac Notch):
بائیں پھیپھڑے میں دل کے لیے ایک گہرا نشان۔
تنفس کا طریقہ کار (Mechanism of Breathing)
بنیادی اصول:
ہوا ہمیشہ زیادہ دباؤ سے کم دباؤ کی طرف حرکت کرتی ہے۔ دباؤ اور حجم کا تعلق الٹ ہوتا ہے (بائل کا قانون)۔
سانس لینا (Inhalation/Inspiration):
ڈایافرام نیچے کی طرف سکڑتا ہے، پسلیاں اوپر اور باہر کی طرف حرکت کرتی ہیں۔ پھیپھڑوں کا حجم بڑھتا ہے اور اندر دباؤ کم ہو جاتا ہے، جس سے ہوا اندر آتی ہے۔
سانس چھوڑنا (Exhalation/Expiration):
ڈایافرام آرام کرتا ہے اور اوپر کی طرف جاتا ہے، پسلیاں نیچے اور اندر کی طرف حرکت کرتی ہیں۔ پھیپھڑوں کا حجم کم ہوتا ہے اور اندر دباؤ بڑھ جاتا ہے، جس سے ہوا باہر نکل جاتی ہے۔
شامل پٹھے
ڈایافرام اور انٹرکوسٹل مسلز (بیرونی اور اندرونی)۔
تنفس کے حجم اور صلاحیتیں (Respiratory Volumes and Capacities)
سپائرومیٹر (Spirometer):
سانس کے حجم اور صلاحیتوں کو ناپنے کا آلہ۔
ٹائیڈل والیم (Tidal Volume - TV):
عام سانس لینے اور چھوڑنے میں ہوا کی مقدار (تقریباً 500 ملی لیٹر)۔
انسپیریٹری ریزرو والیم (Inspiratory Reserve Volume - IRV):
عام سانس لینے کے بعد زبردستی اندر لی جانے والی اضافی ہوا۔ (2500-3000 ملی لیٹر)
ایکسپریٹری ریزرو والیم (Expiratory Reserve Volume - ERV):
عام سانس چھوڑنے کے بعد زبردستی باہر نکالی جانے والی اضافی ہوا۔ (1000-1100 ملی لیٹر)
ریزیدول والیم (Residual Volume - RV):
زبردستی سانس چھوڑنے کے بعد بھی پھیپھڑوں میں باقی رہنے والی ہوا کی مقدار (1100-1200 ملی لیٹر)۔
انسپیریٹری کیپیسٹی (Inspiratory Capacity - IC):
عام سانس چھوڑنے کے بعد زبردستی اندر لی جانے والی کل ہوا (TV + IRV)۔
فنکشنل ریزیدول کیپیسٹی (Functional Residual Capacity - FRC):
عام سانس چھوڑنے کے بعد پھیپھڑوں میں موجود کل ہوا (ERV + RV)۔
وائٹل کیپیسٹی (Vital Capacity - VC):
زبردستی سانس لینے کے بعد زبردستی باہر نکالی جانے والی ہوا کی مقدار (TV + IRV + ERV)۔
ٹوٹل لنگ کیپیسٹی (Total Lung Capacity - TLC):
زبردستی سانس لینے کے بعد پھیپھڑوں میں موجود ہوا کی کل مقدار (VC + RV)۔
گیسوں کا تبادلہ (Exchange of Gases)
تبادلے کی جگہ:
ایلوولی (Alveoli) اور خون کی نالیاں (Capillaries) کے درمیان۔
تبادلے کی ساخت:
تین پرتیں: ایلوولی کی سمپل سکویمس ایپی تھیلیم، خون کی نالی کی اینڈوتھیلیم، اور بیچ کی بیسمنٹ ممبرین۔
تبادلے کے عوامل:
1. دباؤ کا فرق (Partial Pressure Gradient) 2. پھیلاؤ کی جھلی کی موٹائی (Thickness of Diffusion Membrane) 3. گیسوں کی حل پذیری (Solubility of Gases) - CO2، O2 سے 20-25 گنا زیادہ حل پذیر ہے۔
تبادلہ کا عمل:
آکسیجن زیادہ دباؤ (ایلوولی) سے کم دباؤ (خون) کی طرف جاتی ہے۔ کاربن ڈائی آکسائیڈ کم دباؤ (ایلوولی) سے زیادہ دباؤ (خون) کی طرف جاتی ہے۔
گیسوں کی نقل و حمل (Transport of Gases)
آکسیجن کی نقل و حمل:
1. 97% ہیموگلوبن کے ذریعے binds ہوکر۔ 2. 3% پلازما میں گھل کر۔ ایک ہیموگلوبن چار آکسیجن مالیکیول لے جا سکتا ہے۔
آکسیجن ڈسوسیشن کرو (Oxygen Dissociation Curve):
یہ ہیموگلوبن کے آکسیجن کے ساتھ جڑنے کو ظاہر کرتا ہے۔ یہ سگموائیڈ (sigmoid) ہوتا ہے۔ * لیفٹ شفٹ (Left Shift): آکسیجن کا ہیموگلوبن سے جڑنا بڑھنا (کم pCO2، کم H+، کم درجہ حرارت)۔ * رائٹ شفٹ (Right Shift): آکسیجن کا ہیموگلوبن سے الگ ہونا (زیادہ pCO2، زیادہ H+، زیادہ درجہ حرارت)۔
کاربن ڈائی آکسائیڈ کی نقل و حمل:
1. 7% پلازما میں گھل کر۔ 2. 20-25% ہیموگلوبن کے ذریعے (کاربامینوہیמוگلوبن بنا کر)۔ 3. 70% بائی کاربونیٹ آئن (HCO3-) کی شکل میں (انزائم کاربونک اینہائڈریز کے ذریعے)۔ CO2 + H2O ⇌ H2CO3 ⇌ H+ + HCO3-
سانس کا کنٹرول (Regulation of Respiration)
نیورل ریگولیشن (Neural Regulation):
میڈولا اوبلونگاتا (Medulla Oblongata) میں ریسپیریٹری ردم سنٹر (Respiratory Rhythm Center) اور پونز (Pons) میں نیومو ٹاکسک سنٹر (Pneumotaxic Center) سانس لینے کی شرح کو کنٹرول کرتے ہیں۔
کیمیکل ریگولیشن (Chemical Regulation):
سینٹرل کیمور سیپٹر (Central Chemoreceptors) اور پیریفرل کیمور سیپٹر (Peripheral Chemoreceptors) CO2 اور H+ آئن کی سطح کو محسوس کرکے سانس کو کنٹرول کرتے ہیں۔
سانس کے امراض (Disorders of Respiration)
دمہ (Asthma):
سانس کی نالیوں میں سوزش اور سکڑاؤ کی وجہ سے سانس لینے میں دشواری، جس سے ویژنگ (wheezing) کی آواز آتی ہے۔
ایمفیسیما (Emphysema):
ایلوولی کی دیواروں کے تباہ ہونے کی وجہ سے پھیپھڑوں کی لچک کا کم ہونا۔ یہ زیادہ تر سگریٹ نوشی سے ہوتا ہے۔
پیشہ ورانہ تنفسی امراض (Occupational Respiratory Disorders):
کانوں، فیکٹریوں وغیرہ میں کام کرنے والے افراد جو دھول اور کیمیکلز کے سانس لینے سے پھیپھڑوں میں فائبروسس (Fibrosis) کا شکار ہو جاتے ہیں (مثلاً، نیومو کوونیوسس - Pneumoconiosis)۔











