2.3 Rules of Electronic Configuration| Chapter 2| Chemistry| Class 11| FBISE New Syllabus 2024 |NBF
Summary
यह वीडियो परमाणु संरचना के अध्याय 2, विषय 3 पर केंद्रित है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन के चार प्रमुख नियमों की व्याख्या की गई है: अवाउ सिद्धांत, n+l नियम, पॉली एक्सक्लूजन सिद्धांत और हुंड का नियम। इसमें समझाया गया है कि इलेक्ट्रॉन पहले निम्न ऊर्जा स्तरों को कैसे भरते हैं, n+l नियम का उपयोग करके ऑर्बिटल्स की ऊर्जा क्रम को कैसे निर्धारित किया जाता है, और पॉली एक्सक्लूजन सिद्धांत तथा हुंड के नियम के अनुसार समरूप ऑर्बिटल्स में इलेक्ट्रॉन कैसे भरे जाते हैं। वीडियो में क्रोमियम जैसे तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन के उदाहरण भी शामिल हैं।
Key Insights
अवाउ सिद्धांत: इलेक्ट्रॉन पहले निम्नतम ऊर्जा वाले ऑर्बिटल्स को भरते हैं, फिर उच्च ऊर्जा वाले।
अवाउ सिद्धांत के अनुसार, परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों को भरते समय, पहले निम्न-ऊर्जा ऑर्बिटल्स को भरा जाता है, और उसके बाद ही उच्च-ऊर्जा ऑर्बिटल्स को भरा जाता है। क्वांटम मैकेनिकल गणनाएँ ऑर्बिटल्स की ऊर्जा को निर्धारित करने में मदद करती हैं, जैसे 1s की ऊर्जा 2s से कम है, 2s की 2p से कम है, और इसी तरह 3p के बाद 4s आता है, फिर 3d।
n+l नियम: ऑर्बिटल की ऊर्जा n (मुख्य क्वांटम संख्या) और l (दिगंशी क्वांटम संख्या) के योग द्वारा निर्धारित होती है।
n+l नियम का उपयोग करके ऑर्बिटल की ऊर्जा का अनुमान लगाया जाता है। जिस ऑर्बिटल के लिए n+l का योग कम होता है, उसकी ऊर्जा कम होती है और उसे पहले भरा जाता है। यदि n+l का योग समान हो, तो मुख्य क्वांटम संख्या (n) के छोटे मान वाले ऑर्बिटल की ऊर्जा कम होती है।
पॉली एक्सक्लूजन सिद्धांत: एक परमाणु में किसी भी दो इलेक्ट्रॉनों के चारों क्वांटम संख्याओं के मान समान नहीं हो सकते।
इस सिद्धांत के अनुसार, एक परमाणु में दो इलेक्ट्रॉन एक ही अवस्था में नहीं हो सकते। यदि उनके मुख्य (n), दिगंशी (l), और चुंबकीय (ml) क्वांटम संख्याएँ समान हैं, तो उनके स्पिन क्वांटम संख्या (ms) अवश्य भिन्न होनी चाहिए (अर्थात, एक +1/2 और दूसरा -1/2)।
हुंड का नियम: समरूप (Degenerate) ऑर्बिटल्स में इलेक्ट्रॉन पहले अकेले-अकेले समान स्पिन के साथ भरे जाते हैं।
जब तक कि प्रत्येक समरूप ऑर्बिटल में एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए, इलेक्ट्रॉन एक ही ऑर्बिटल में जोड़े नहीं जाते। इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉनों को पहले प्रत्येक उपलब्ध ऑर्बिटल में एक-एक करके समान स्पिन के साथ भरा जाता है, और उसके बाद ही उनकी पेयरिंग (विपरीत स्पिन के साथ) शुरू होती है।
Sections
अवाउ सिद्धांत (Aufbau Principle)
अवाउ सिद्धांत: इलेक्ट्रॉन पहले निम्नतम ऊर्जा वाले ऑर्बिटल्स को भरते हैं, फिर उच्च ऊर्जा वाले।
अवाउ सिद्धांत के अनुसार, परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों को भरते समय, पहले निम्न-ऊर्जा ऑर्बिटल्स को भरा जाता है, और उसके बाद ही उच्च-ऊर्जा ऑर्बिटल्स को भरा जाता है। क्वांटम मैकेनिकल गणनाएँ ऑर्बिटल्स की ऊर्जा को निर्धारित करने में मदद करती हैं, जैसे 1s की ऊर्जा 2s से कम है, 2s की 2p से कम है, और इसी तरह 3p के बाद 4s आता है, फिर 3d।
ऑर्बिटल्स का ऊर्जा क्रम याद करने की विधि।
ऑर्बिटल्स के ऊर्जा क्रम को याद करने के लिए, पहले शेल्स के अनुसार ऑर्बिटल्स की सूची बनाई जाती है (जैसे शेल 1 में 1s, शेल 2 में 2s, 2p, आदि)। फिर, डायगोनल कटिंग का उपयोग करके एक विशिष्ट पैटर्न में ऑर्बिटल्स को काटा जाता है, जिससे ऊर्जा का क्रम (1s, 2s, 2p, 3s, 3p, 4s, 3d, 4p, 5s, आदि) प्राप्त होता है।
11वें इलेक्ट्रॉन का स्थान निर्धारित करना।
11वें इलेक्ट्रॉन का स्थान निर्धारित करने के लिए, ऊर्जा क्रम का पालन किया जाता है: 1s (2 इलेक्ट्रॉन), 2s (2 इलेक्ट्रॉन), 2p (6 इलेक्ट्रॉन) भर दिए जाते हैं। कुल 10 इलेक्ट्रॉन भरने के बाद, अगला 11वां इलेक्ट्रॉन 3s ऑर्बिटल में जाएगा क्योंकि 3s की ऊर्जा 3p से कम है।
ऑर्बिटल्स को बढ़ते ऊर्जा क्रम में व्यवस्थित करना।
दिए गए ऑर्बिटल्स (3p, 4s, 3d) को उनके बढ़ते ऊर्जा क्रम में व्यवस्थित करने के लिए, उनके ऊर्जा स्तरों की तुलना की जाती है। उदाहरण के लिए, 4s की ऊर्जा 3d से कम है, इसलिए 4s पहले आता है, और 3d के बाद 4p आता है, फिर 5s।
n + l नियम
n+l नियम: ऑर्बिटल की ऊर्जा n (मुख्य क्वांटम संख्या) और l (दिगंशी क्वांटम संख्या) के योग द्वारा निर्धारित होती है।
n+l नियम का उपयोग करके ऑर्बिटल की ऊर्जा का अनुमान लगाया जाता है। जिस ऑर्बिटल के लिए n+l का योग कम होता है, उसकी ऊर्जा कम होती है और उसे पहले भरा जाता है। यदि n+l का योग समान हो, तो मुख्य क्वांटम संख्या (n) के छोटे मान वाले ऑर्बिटल की ऊर्जा कम होती है।
4s और 3d ऑर्बिटल्स की ऊर्जा की तुलना।
4s ऑर्बिटल के लिए n=4, l=0, तो n+l = 4। 3d ऑर्बिटल के लिए n=3, l=2, तो n+l = 5। चूंकि 4s का n+l योग (4) 3d के n+l योग (5) से कम है, इसलिए 4s की ऊर्जा कम है और इलेक्ट्रॉन पहले 4s में भरे जाते हैं, फिर 3d में।
5f और 6p ऑर्बिटल्स की ऊर्जा की तुलना।
5f ऑर्बिटल के लिए n=5, l=3, तो n+l = 8। 6p ऑर्बिटल के लिए n=6, l=1, तो n+l = 7। 6p का n+l योग (7) 5f के n+l योग (8) से कम है, इसलिए 6p की ऊर्जा कम है और इलेक्ट्रॉन पहले 6p में भरे जाएंगे।
पॉली एक्सक्लूजन सिद्धांत (Pauli Exclusion Principle)
पॉली एक्सक्लूजन सिद्धांत: एक परमाणु में किसी भी दो इलेक्ट्रॉनों के चारों क्वांटम संख्याओं के मान समान नहीं हो सकते।
इस सिद्धांत के अनुसार, एक परमाणु में दो इलेक्ट्रॉन एक ही अवस्था में नहीं हो सकते। यदि उनके मुख्य (n), दिगंशी (l), और चुंबकीय (ml) क्वांटम संख्याएँ समान हैं, तो उनके स्पिन क्वांटम संख्या (ms) अवश्य भिन्न होनी चाहिए (अर्थात, एक +1/2 और दूसरा -1/2)।
एक ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉनों की विपरीत स्पिन।
एक ही ऑर्बिटल में स्थित दो इलेक्ट्रॉनों के लिए, मुख्य, दिगंशी, और चुंबकीय क्वांटम संख्याएँ समान होती हैं। पॉली एक्सक्लूजन सिद्धांत के अनुसार, इन दोनों इलेक्ट्रॉनों की स्पिन क्वांटम संख्याएँ विपरीत होनी चाहिए; यदि एक क्लॉकवाइज (+1/2) है, तो दूसरा एंटीक्लॉकवाइज (-1/2) होगा।
हुंड का नियम (Hund's Rule)
हुंड का नियम: समरूप (Degenerate) ऑर्बिटल्स में इलेक्ट्रॉन पहले अकेले-अकेले समान स्पिन के साथ भरे जाते हैं।
जब तक कि प्रत्येक समरूप ऑर्बिटल में एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए, इलेक्ट्रॉन एक ही ऑर्बिटल में जोड़े नहीं जाते। इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉनों को पहले प्रत्येक उपलब्ध ऑर्बिटल में एक-एक करके समान स्पिन के साथ भरा जाता है, और उसके बाद ही उनकी पेयरिंग (विपरीत स्पिन के साथ) शुरू होती है।
पूर्ण भरे और अर्ध-पूर्ण ऑर्बिटल्स की स्थिरता।
हुंड के नियम से पता चलता है कि अर्ध-पूर्ण (half-filled) और पूर्ण-रूप से भरे (fully-filled) ऑर्बिटल्स वाले परमाणु अधिक स्थिर होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक जैसे स्पिन वाले इलेक्ट्रॉनों के अकेले-अकेले भरे जाने से स्थिरता बढ़ती है।
क्रोमियम (z=24) का इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन।
क्रोमियम का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन 24+2=22 इलेक्ट्रॉन भरने के बाद 3d में 4 इलेक्ट्रॉन होंगे। लेकिन स्थिरता के लिए, एक 4s इलेक्ट्रॉन (जो 2s2 के रूप में वहाँ है) 3d में एक ऑर्बिटल में चला जाता है, जिससे कॉन्फ़िगरेशन 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s¹ 3d⁵ हो जाती है। यह 3d ऑर्बिटल्स को अर्ध-पूर्ण बनाता है, जो अत्यधिक स्थिर है।
इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन में स्थिरता का महत्व।
परमाणु ऊर्जा स्तरों को भरने के लिए स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं। क्रोमियम और कॉपर जैसे तत्वों के मामलों में, पूर्ण या अर्ध-पूर्ण ऑर्बिटल्स प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा वाले ऑर्बिटल (जैसे 4s) से उच्च ऊर्जा वाले ऑर्बिटल (जैसे 3d) में उत्तेजित हो सकते हैं।
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