WisdomEye Logo
WisdomEye

शनि की साढ़ेसाती, ढैया या दशा से परेशान? करें ये असरदार उपाय | Shani Ke Upay | Acharya Sunil Mehtani

Summary

इस वीडियो में आचार्य सुनील मेहतानी कुंडली में शनिदेव के अशुभ प्रभावों जैसे नौकरी और व्यापार में रुकावट, कर्ज, तनाव, अकेलापन और साढ़ेसाती या ढैया के कष्टों को दूर करने के लिए पारंपरिक, धार्मिक और ज्योतिषीय उपायों की जानकारी दे रहे हैं। इनमें विशिष्ट स्त्रोत पाठ, मंत्र जाप, शनिवार का व्रत, दान-पुण्य और पीपल वृक्ष से जुड़े टोटके शामिल हैं। अंत में उन्होंने विशेष चमत्कारी उपायों के साथ सकारात्मक परिवर्तन लाने के तरीके बताए हैं जो जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

Key Insights

शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं और अशुभ स्थिति में जीवन में गंभीर चुनौतियां लाते हैं।

ज्योतिष के अनुसार शनि को कर्म, न्याय, अनुशासन और कठिन सबक सिखाने वाला ग्रह माना गया है। यदि कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ हो या उनकी साढ़ेसाती, ढैया, महादशा चल रही हो तो व्यक्ति को करियर में रुकावट, व्यापार में हानि, कर्ज, मानसिक तनाव, डिप्रेशन, पारिवारिक कलह, और कोर्ट-कचहरी की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि, शनि शुभ होने पर व्यक्ति को अपार सफलता और ऊंचाइयों पर भी ले जा सकते हैं।

शनि के कष्टों को कम करने के लिए सेवा भाव, दान और हनुमान जी की आराधना सबसे अधिक फलदायी है।

शनि कर्म और सेवा के कारक हैं, इसलिए शनिवार को गरीबों, मजदूरों और बुजुर्गों का आदर एवं सहायता करने से शनिदेव अत्यधिक प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही हनुमान जी और शनिदेव के बीच के पौराणिक संबंधों के कारण, मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि की पीड़ा से शीघ्र राहत मिलती है।

Sections

शनि के अशुभ प्रभाव और ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्म, न्याय और अनुशासन सिखाने वाला मुख्य और शक्तिशाली ग्रह माना गया है।

आचार्य सुनील मेहतानी बताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को बेहद महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। वह हमारे जीवन में अनुशासन, न्याय और हमारे अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यदि शनि कुंडली में शुभ स्थिति में हों, तो वे जातक को रंक से राजा बना सकते हैं और सफलता की सर्वोच्च सीमाओं तक पहुंचा सकते हैं।

कुंडली में शनि का प्रभाव अशुभ होने पर व्यक्ति को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनिदेव पाप प्रभाव में होते हैं या शनि की साढ़ेसाती, ढैया, महादशा या अंतर्दशा चल रही होती है, तो उसके करियर में बार-बार रुकावट आने लगती है। पदोन्नति का रुक जाना, व्यापार में लगातार नुकसान होना, आर्थिक संकट उत्पन्न होना, कर्ज का लगातार बढ़ना, अत्यधिक मानसिक तनाव, अकेलापन, डिप्रेशन, पारिवारिक कलह, कानूनी उलझने और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं इसके प्रमुख लक्षण हैं।


मंत्र और धार्मिक पाठ के चमत्कारी उपाय

शनिवार के दिन दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करने से शनि की गंभीर पीड़ा काफी कम हो जाती है।

शनि के अशुभ प्रभावों और कष्टों से मुक्ति पाने के लिए शनिवार के दिन 'दशरथ कृत शनि स्त्रोत' का भक्तिपूर्वक पाठ करना अत्यंत लाभकारी और शक्तिशाली माना जाता है। इससे शनि की क्रूर दृष्टि का प्रभाव जातक पर कम होता है।

शनिवार को पीपल शनि पीड़ा नाशक स्त्रोत का पाठ करने से मानसिक तनाव और विविध अवरोधों से मुक्ति मिलती है।

शनिवार के दिन पीपल शनि पीड़ा नाशक स्त्रोत का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से जीवन की बड़ी-बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं। यह पाठ मानसिक शांति प्रदान करता है और जातक को तनावमुक्त रखने में सहायक सिद्ध होता है।

नकारात्मकता को दूर करने और आत्मबल बढ़ाने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जाप करना फलदायी है।

शनिदेव के अशुभ प्रभावों को शांत करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जाप करना अत्यंत लाभकारी है। इसका सवा लाख बार जाप करने से सभी नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं और व्यक्ति का आत्मबल एवं मानसिक शक्ति बहुत अधिक मजबूत होती है।

शनिवार एवं मंगलवार को हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से शनि के समस्त कष्टों से राहत मिलती है।

शनि महाराज की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्तों को शनिदेव कभी भी कष्ट नहीं पहुंचाते हैं, जिससे उनके जीवन की बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।


शनिवार के व्रत, स्नान और पूजा की विधियां

शनिवार को शनिदेव का व्रत रखने, कथा सुनने और शाम को हनुमान व भैरव जी के दर्शन का विधान है।

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए जातक शनिवार के दिन व्रत रख सकते हैं। इस व्रत के दौरान शनिदेव का पूजन करें और शनिवार व्रत की कथा जरूर पढ़ें। व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिनभर में केवल दूध, लस्सी या ताजे फलों का ही सेवन करना चाहिए और संध्याकाल में हनुमान जी या फिर भैरव जी के दर्शन करने मंदिर जाना चाहिए।

शनिवार को नहाने के पानी में एक चुटकी काला तिल डालकर स्नान करने से शनि दोष दूर होता है।

शनि दोषों की शांति के लिए शनिवार की सुबह स्नान करने वाले जल में एक चुटकी काले तिल मिला लें। इस विशेष जल से स्नान करना शनि दोष को शांत करने का एक बहुत ही सरल, पारंपरिक और बेहद प्रभावी उपाय माना गया है।

शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शनि कृपा पाने का प्रसिद्ध उपाय है।

शनि की विशेष कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए प्रत्येक शनिवार को संध्याकाल में पीपल के पेड़ की जड़ के समीप सरसों के तेल का एक दीपक जरूर जलाएं। यह उपाय लोक परंपराओं में शनिदेव को खुश करने के लिए अत्यधिक लोकप्रिय और अचूक माना गया है।


दान, सेवा और पेड़ से जुड़े पारंपरिक टोटके

शनिवार को गरीबों, वृद्धों और मजदूरों की सेवा व भोजन-वस्त्र दान करने से शनिदेव बहुत प्रसन्न होते हैं।

चूंकि शनिदेव कर्म, न्याय और सेवा भावना के कारक ग्रह हैं, इसलिए शनिवार के दिन गरीब असहाय लोगों की मदद करना, दिव्यांगों की सेवा करना, वृद्धों का सम्मान करना और मजदूरों को उनकी मेहनत का पूरा हक देना शनि दोष को शांत करता है। इसके अतिरिक्त, शनिवार के दिन काले तिल, काली उड़द की दाल और कंबल जैसी चीजों का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

शनिवार शाम पीपल के तने पर सात बार कच्चा सूत लपेटकर शनि मंत्र का जाप करने से गलतियों से क्षमा मिलती है।

शनिदेव को प्रसन्न करने का एक सरल और अत्यधिक प्रभावी उपाय यह है कि शनिवार की शाम के समय किसी पीपल के पेड़ के तने के चारों ओर सात बार कच्चा सूत (सफेद धागा) लपेटें। इस प्रक्रिया के दौरान निरंतर शनिदेव के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करते रहें और अंत में अपनी ज्ञात व अज्ञात गलतियों के लिए शनि महाराज से हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना करें।

उड़द, काले तिल, तेल और गुड़ का लड्डू बनाकर मिट्टी में दबाने से शनि पीड़ा शांत हो जाती है।

शनि से संबंधित पीड़ा और जीवन में आ रही तमाम परेशानियों को दूर करने के लिए, शनिवार के दिन काली उड़द की दाल, कुछ काले तिल, थोड़ा सा तेल और गुड़ को मिलाकर एक लड्डू तैयार कर लें। इस लड्डू को किसी पार्क या पेड़ के पास सुनसान जगह पर मिट्टी के नीचे दबा दें। कई पारंपरिक मान्यताओं में इसे शनि बाधा दूर करने का अचूक टोटका माना गया है।


विशेष और चमत्कारी तांत्रिक उपाय

शनिवार के दिन 19 हाथ लंबा काला धागा गले में माला की तरह पहनने से शनि के बुरे प्रभाव दूर होते हैं।

वीडियो के अंत में आचार्य जी एक अत्यंत विशेष चमत्कारी उपाय का जिक्र करते हैं। वे बताते हैं कि यदि जातक शनिवार को अपने हाथ के नाप से 19 हाथ लंबा काला सूती धागा लेकर उसकी माला बना ले और उसे अपने गले में धारण कर ले, तो शनि के बड़े से बड़े अशुभ प्रभाव और कष्टों से उसे तुरंत छुटकारा और सुरक्षा प्राप्त होती है।

काले घोड़े की नाल या नाव की कील का छल्ला शनिवार को मध्यमा उंगली में धारण करना लाभकारी है।

शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल से बना छल्ला या फिर पुरानी नाव के तल से निकली लोहे की कील का बना छल्ला अपनी दाहिने हाथ की मध्यमा (बीच की) उंगली में धारण करने से शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है। हालांकि, आचार्य जी यह चेतावनी भी देते हैं कि शनि का कोई भी रत्न (जैसे नीलम) या धातु धारण करने से पहले किसी अनुभवी और योग्य ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण अवश्य करा लेना चाहिए।


Ask a Question

*Uses 1 Wisdom coin from your coin balance

Watch Video

Open in YouTube
WisdomEye Avatar
Got a minute?