#Ncert Geography (class -7) chp- 6 (प्राकृतिक वनस्पति व वन्य जीव) #handmadenotes
Summary
यह वीडियो एनसीईआरटी ज्योग्राफी क्लास 7 के चैप्टर 6 'प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीव' का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें प्राकृतिक वनस्पति के प्रकारों, जैसे कि वन, घास स्थल और टुंड्रा वनस्पति, के भौगोलिक वितरण और विशेषताओं पर चर्चा की गई है। वीडियो में विभिन्न प्रकार के वनों, जैसे उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, पर्णपाती वन, भूमध्यसागरीय वनस्पति और शंकुधारी वनों का वर्णन किया गया है, साथ ही उनके जलवायु, प्रमुख वृक्षों और वन्यजीवों का भी उल्लेख है। घास स्थलों को उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण कटिबंधीय में वर्गीकृत किया गया है, और टुंड्रा वनस्पति के बारे में भी बताया गया है।
Key Insights
प्राकृतिक वनस्पति का वर्गीकरण और उसके वितरण को प्रभावित करने वाले कारक.
प्राकृतिक वनस्पति को मुख्य रूप से वन, घास स्थल और टुंड्रा वनस्पति में वर्गीकृत किया गया है। वन उन क्षेत्रों में उगते हैं जहाँ पर्याप्त वर्षा और उपयुक्त तापमान होता है। वनस्पति के विकास को तापमान, वर्षा, भूमि की ऊंचाई और मिट्टी जैसे कारक प्रभावित करते हैं। ये कारक वनस्पति के प्रकार और उसके वितरण को निर्धारित करते हैं।
वनस्पति के प्रकारों के अनुसार जीवों का सह-अस्तित्व.
विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों में विभिन्न प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में हाथी, बंदर और शेर पाए जाते हैं, जबकि शंकुधारी वनों में रजत, रोमिल भालू और कई प्रकार के पक्षी जैसे मोनाल मौजूद होते हैं। घास स्थलों में भी विभिन्न प्रकार के शाकाहारी और मांसाहारी जीव निवास करते हैं।
Sections
प्राकृतिक वनस्पति और उसके प्रकार
प्राकृतिक वनस्पति वह वनस्पति है जिसकी उत्पत्ति स्वाभाविक रूप से हुई हो।
प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है पृथ्वी पर पाई जाने वाली वह वनस्पति जिसकी उत्पत्ति किसी भी मानव हस्तक्षेप के बिना स्वाभाविक रूप से हुई हो, जैसे कि जंगल और वन। यह भूमि के उस हिस्से को संदर्भित करती है जो प्राकृतिक रूप से उगा है।
वनस्पति के विकास को तापमान, वर्षा, भूमि और मिट्टी प्रभावित करती है।
वनस्पति के विकास और प्रकार को मुख्य रूप से चार कारकों द्वारा प्रभावित किया जाता है: तापमान (Temperature), वर्षा (Rainfall), भूमि की ऊंचाई (Altitude), और मिट्टी (Soil)। ये कारक मिलकर यह निर्धारित करते हैं कि किसी विशेष क्षेत्र में किस प्रकार की वनस्पति उगेगी।
प्राकृतिक वनस्पति की मुख्य श्रेणियां वन, घास स्थल और झाड़ियाँ हैं।
प्राकृतिक वनस्पति को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है: वन (Forests), जो घने वृक्षों वाले क्षेत्र होते हैं; घास स्थल (Grasslands), जहाँ घास की प्रधानता होती है; और झाड़ियाँ (Shrubs), जो छोटे, काँटेदार पौधे होते हैं।
वन उपयुक्त तापमान और परिपूर्ण वर्षा वाले क्षेत्रों में अच्छी तरह विकसित होते हैं।
वन, विशेष रूप से घने वन, उन क्षेत्रों में अच्छी तरह से विकसित होते हैं जहाँ तापमान उपयुक्त होता है और वर्षा की मात्रा पर्याप्त होती है। ये भौगोलिक परिस्थितियाँ वृक्षों के विकास और घने जंगलों के निर्माण के लिए अनुकूल होती हैं।
वनों के चार मुख्य प्रकार: उष्णकटिबंधीय सदाबहार, उष्णकटिबंधीय पर्णपाती, भूमध्यसागरीय और शंकुधारी वन।
वनों को मुख्य रूप से चार प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है, जो उनके भौगोलिक स्थिति और जलवायु के आधार पर भिन्न होते हैं: उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन, भूमध्यसागरीय वनस्पति और शंकुधारी वन। इन सभी के बारे में पुस्तक में विस्तार से बताया गया है।
उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Tropical Evergreen Forests)
इन्हें उष्णकटिबंधीय वर्षावन भी कहते हैं और ये भूमध्य रेखा के पास पाए जाते हैं।
उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों को उष्णकटिबंधीय वर्षावन (Tropical Rainforests) के नाम से भी जाना जाता है। ये वन भूमध्य रेखा (0 डिग्री अक्षांश) के दोनों ओर और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के पास पाए जाते हैं।
ये क्षेत्र गर्म होते हैं और पूरे वर्ष भारी वर्षा होती है।
इन वनों वाले क्षेत्र पूरे वर्ष गर्म रहते हैं और यहाँ वर्षा की मात्रा बहुत अधिक होती है। यह उच्च तापमान और प्रचुर वर्षा इन वनों के सघन वनस्पति विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती है।
पेड़ों की पत्तियाँ साल भर नहीं झड़तीं, इसलिए ये सदाबहार कहलाते हैं।
उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहाँ के पेड़ों की पत्तियाँ साल भर हरी रहती हैं और एक साथ नहीं झड़तीं। इसी कारण इन्हें 'सदाबहार वन' कहा जाता है।
प्रमुख वृक्षों में आबनूस, महोगनी, रोजवुड शामिल हैं।
इन वनों में पाए जाने वाले प्रमुख वृक्षों में आबनूस (Ebony), महोगनी (Mahogany), रोजवुड (Rosewood) और रबर के वृक्ष प्रमुख हैं। यह वृक्ष दृढ़ काष्ठ वाले होते हैं।
यहाँ बाघ, हाथी, श्वास, गोल्डन लंगूर जैसे जीव पाए जाते हैं।
उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में विविध प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं, जिनमें भारतीय हाथी, बाघ, विभिन्न प्रकार के बंदर जैसे गोल्डन लंगूर, और अन्य सरीसृप और पक्षी शामिल हैं।
उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन (Tropical Deciduous Forests)
इन्हें मानसूनी वन भी कहा जाता है और ये मौसमी परिवर्तन के प्रभाव वाले क्षेत्रों में होते हैं।
उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों को मानसूनी वन (Monsoon Forests) भी कहते हैं। ये उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ मौसम में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं, विशेषकर शुष्क और आर्द्र मौसम।
शुष्क मौसम में जल संरक्षण के लिए वृक्ष अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।
इन वनों की विशेषता है कि शुष्क मौसम के दौरान, जल की बचत करने के लिए वृक्ष अपनी सारी पत्तियाँ गिरा देते हैं। यह मौसमी अनुकूलन उन्हें सूखे की स्थिति से निपटने में मदद करता है।
ये वन भारत, ऑस्ट्रेलिया, मध्य अमेरिका में पाए जाते हैं।
उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन मुख्य रूप से भारत, ऑस्ट्रेलिया, मध्य अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं। ये क्षेत्र मानसूनी जलवायु के प्रभाव में होते हैं।
प्रमुख वृक्षों में साल, सागौन, नीम और शीशम शामिल हैं।
इन वनों के प्रमुख वृक्षों में साल (Sal), सागौन (Teak), नीम (Neem) और शीशम (Shisham) शामिल हैं। ये दृढ़ काष्ठ वाले वृक्ष होते हैं जिनका व्यावसायिक महत्व भी है।
वन्यजीवों में बाघ, हाथी, शेर, हिरण, और विभिन्न प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं।
इन वनों में बाघ, हाथी, शेर, हिरण, बारहसिंगा जैसे बड़े स्तनधारी जीव पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, विभिन्न प्रकार के पक्षी, सरीसृप और कीड़े-मकोड़े भी इन वनों के पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं।
शीतोष्ण सदाबहार वन (Temperate Evergreen Forests)
ये वन 45° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के पास पाए जाते हैं।
शीतोष्ण सदाबहार वन मुख्य रूप से महाद्वीपों के पूर्वी किनारों पर, 45° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के मध्य के क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में स्थित होते हैं।
इनमें दृढ़ और मुलायम दोनों प्रकार के पेड़ पाए जाते हैं।
शीतोष्ण सदाबहार वनों में दृढ़ काष्ठ (Hardwood) और मुलायम काष्ठ (Softwood) दोनों प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं। इन वृक्षों की प्रजातियाँ क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
उदाहरण: दक्षिण-पूर्वी अमेरिका, ब्राज़ील के दक्षिण-पूर्वी भाग।
शीतोष्ण सदाबहार वनों के कुछ प्रमुख उदाहरणों में दक्षिण-पूर्वी अमेरिका (जैसे फ्लोरिडा) और दक्षिण-पूर्वी ब्राज़ील के तटीय प्रदेश शामिल हैं। इन क्षेत्रों में आर्द्र जलवायु पाई जाती है।
शीतोष्ण पर्णपाती वन (Temperate Deciduous Forests)
ये वन उत्तर-पूर्वी अमेरिका, चीन, और पश्चिम यूरोप के तटीय प्रदेशों में मिलते हैं।
शीतोष्ण पर्णपाती वन मुख्य रूप से महाद्वीपों के पूर्वी किनारों पर 45° से 55° अक्षांशों के मध्य पाए जाते हैं। प्रमुख उदाहरणों में उत्तर-पूर्वी अमेरिका, चीन, जापान और पश्चिम यूरोप के तटीय प्रदेश शामिल हैं।
इनमें विशेष प्रकार के ओक, राख, बीच के पेड़ होते हैं।
इन वनों में पाए जाने वाले प्रमुख वृक्षों में ओक (Oak), राख (Ash), बीच (Beech) और मेपल (Maple) शामिल हैं। ये पेड़ आमतौर पर दृढ़ काष्ठ वाले होते हैं।
यहाँ पाए जाने वाले वन्यजीव पक्षी, हिरण, लोमड़ी, भालू हैं।
शीतोष्ण पर्णपाती वनों में विभिन्न प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं, जिनमें हिरण, लोमड़ी, भालू, खरगोश और विभिन्न प्रजातियों के पक्षी प्रमुख हैं। ये जीव मौसमी परिवर्तनों के अनुसार अनुकूलित होते हैं।
इन वनों के पेड़ शुष्क मौसम में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।
शीतोष्ण पर्णपाती वनों के वृक्षों की विशेषता यह है कि वे शुष्क मौसम या पतझड़ के दौरान अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं, जिससे वे ठंडे मौसम और जल की कमी का सामना कर पाते हैं।
भूमध्यसागरीय वनस्पति (Mediterranean Vegetation)
ये वन महाद्वीपों के पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम किनारों पर पाए जाते हैं।
भूमध्यसागरीय वनस्पति मुख्य रूप से महाद्वीपों के पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम किनारों पर, लगभग 30° से 40° अक्षांशों के बीच पाई जाती है। इसका नाम भूमध्य सागर के चारों ओर के क्षेत्रों से प्रेरित है।
यहाँ गर्म, शुष्क ग्रीष्मकाल और हल्की, आर्द्र सर्दियाँ होती हैं।
इन क्षेत्रों की जलवायु की विशेषता यह है कि यहाँ गर्म, शुष्क ग्रीष्मकाल और हल्की, आर्द्र सर्दियाँ होती हैं। यह जलवायु विशेष प्रकार की वनस्पति के विकास के लिए अनुकूल है।
प्रमुख रूप से खट्टे फल, अंगूर, जैतून और अंजीर उगाए जाते हैं।
यह क्षेत्र अपनी फलों की कृषि के लिए प्रसिद्ध है, खासकर खट्टे फलों जैसे संतरे, नींबू, अंगूर, जैतून और अंजीर की खेती यहाँ बड़े पैमाने पर की जाती है। इसे 'फलों की कृषि की कहानी' भी कहा जाता है।
पेड़ों की मोटी छाल और छोटे पत्ते वाष्पोत्सर्जन को रोकते हैं।
भूमध्यसागरीय वनस्पति में पाए जाने वाले पेड़ों की मोटी छाल होती है और उनके पत्ते छोटे होते हैं, जो वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) को कम करने में मदद करते हैं। यह शुष्क ग्रीष्मकाल के अनुकूलन का एक तरीका है।
कम वन्यजीव पाए जाते हैं, लेकिन विविध पक्षी और छोटे स्तनधारी होते हैं।
भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में वन्यजीवों की विविधता तुलनात्मक रूप से कम होती है, लेकिन यहाँ विभिन्न प्रकार के पक्षी, लोमड़ी, खरगोश और जंगली बकरियों जैसे छोटे स्तनधारी पाए जाते हैं।
शंकुधारी वन (Coniferous Forests)
ये वन 50° से 70° अक्षांशों के मध्य, विशेषकर उत्तरी गोलार्ध में मिलते हैं।
शंकुधारी वन, जिन्हें टैगा (Taiga) वन भी कहा जाता है, मुख्य रूप से 50° से 70° उत्तरी अक्षांशों के बीच पाए जाते हैं। ये उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के विशाल भूभाग में फैले हुए हैं।
इनमें लंबे, पतले वृक्ष होते हैं जिनकी पत्तियाँ शंक्वाकार (कोन के आकार की) होती हैं।
शंकुधारी वनों की विशेषता है कि यहाँ लंबे, पतले वृक्ष पाए जाते हैं जिनके पत्ते शंक्वाकार (Cone-shaped) होते हैं। ये नुकीले पत्ते बर्फ को आसानी से फिसलने में मदद करते हैं और जल हानि को भी कम करते हैं।
प्रमुख वृक्ष: चीड़, देवदार, फर।
शंकुधारी वनों के मुख्य वृक्षों में चीड़ (Pine), देवदार (Cedar), फर (Fir) और स्प्रूस (Spruce) शामिल हैं। ये वृक्ष कठोर जलवायु परिस्थितियों में भी जीवित रहने के लिए अनुकूलित होते हैं।
यहां रजत🌬️, रोमिल भालू, कस्तूरी बैल जैसे जीव मिलते हैं।
इन वनों में पाए जाने वाले वन्यजीवों में रजत (Lynx), रोमिल भालू (Brown Bear), कस्तूरी बैल (Musk Deer), बारहसिंगा (Reindeer) और विभिन्न प्रकार के पक्षी जैसे उल्लू और कठफोड़वा शामिल हैं। ये जीव ठंडे मौसम के लिए अनुकूलित होते हैं।
इन वनों की लकड़ी का उपयोग लुगदी, माचिस और पैकिंग के डिब्बे बनाने में होता है।
शंकुधारी वनों से प्राप्त लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से कागज का लुगदी (Paper Pulp), माचिस की तीलियाँ (Matchsticks) और पैकिंग के डिब्बे (Packing Boxes) बनाने में किया जाता है। यह अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है।
घास स्थल (Grasslands)
घास स्थल उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा वन को सहारा देने के लिए अपर्याप्त होती है।
घास स्थल वे क्षेत्र होते हैं जहाँ वनस्पति का प्रमुख रूप घास होता है। ये उन क्षेत्रों में विकसित होते हैं जहाँ वर्षा की मात्रा उतनी नहीं होती कि घने वन उग सकें, लेकिन इतनी होती है कि मरुस्थल न बन सके।
मुख्यतः दो प्रकार: उष्णकटिबंधीय घास स्थल और शीतोष्ण घास स्थल।
घास स्थलों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: उष्णकटिबंधीय घास स्थल (Tropical Grasslands) और शीतोष्ण घास स्थल (Temperate Grasslands)। इनका वितरण और विशेषताएँ अक्षांशीय स्थिति पर निर्भर करती हैं।
उष्णकटिबंधीय घास स्थल भूमध्य रेखा के दोनों ओर पाए जाते हैं।
उष्णकटिबंधीय घास स्थल भूमध्य रेखा के दोनों ओर, यानी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यहाँ घास की ऊंचाई 3 से 4 मीटर तक हो सकती है।
पूर्वी अफ्रीका में सवाना, ब्राजील में कंपोस, वेनेजुएला में लानोस कहलाते हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में उष्णकटिबंधीय घास स्थलों के अलग-अलग नाम हैं। पूर्वी अफ्रीका में इन्हें 'सवाना' (Savanna), ब्राजील में 'कंपोस' (Campos) और वेनेजुएला में 'लानोस' (Llanos) कहा जाता है। यह मिलान करने वाले प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण बिंदु है।
शीतोष्ण घास स्थल महाद्वीपों के भीतरी भागों में पाए जाते हैं।
शीतोष्ण घास स्थल आमतौर पर महाद्वीपों के मध्य भागों में, 40° से 60° अक्षांशों के बीच, पाए जाते हैं। यहाँ की जलवायु में मौसम का स्पष्ट अंतर होता है।
उत्तरी अमेरिका में प्रेयरी, यूरेशिया में स्टेपी, दक्षिण अफ्रीका में वेल्ड कहलाते हैं।
शीतोष्ण घास स्थलों के भी क्षेत्रीय नाम हैं: उत्तरी अमेरिका में 'प्रेयरी' (Prairie), यूरेशिया (रूस) में 'स्टेपी' (Steppe), और दक्षिण अफ्रीका में 'वेल्ड' (Veld) के नाम से जाने जाते हैं। अर्जेंटीना में इन्हें 'पम्पास' कहा जाता है।
मरुस्थलीय वनस्पति (Desert Vegetation)
ये वनस्पति शुष्क रेगिस्तानी प्रदेशों में पाई जाती है।
मरुस्थलीय वनस्पति उन क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ वर्षा बहुत कम होती है और जलवायु अत्यंत शुष्क होती है। ये रेगिस्तानी प्रदेशों की विशेषता है।
कांटेदार झाड़ियाँ और छाल वाले पौधे आम हैं।
मरुस्थलीय क्षेत्रों में कंटीली झाड़ियाँ, कैक्टस (Cactus) और अन्य ऐसे पौधे पाए जाते हैं जिनकी पत्तियाँ छोटी या काँटों के रूप में रूपांतरित होती हैं और जिनकी छाल मोटी होती है। ये जल हानि को कम करने में मदद करते हैं।
ये वनस्पति महाद्वीपों के पश्चिम किनारों पर मिलती है।
मरुस्थलीय क्षेत्रों का वितरण महाद्वीपों के पश्चिम किनारों पर अधिक पाया जाता है। इसका कारण ठंडी समुद्री धाराओं का प्रभाव है, जो इन क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा को कम कर देता है।
कम वनस्पति के कारण वन्यजीव भी कम होते हैं।
मरुस्थलीय क्षेत्रों में बहुत कम वनस्पति होने के कारण, वन्यजीवों की संख्या और विविधता भी कम होती है। यहाँ पाए जाने वाले जीव शुष्क और गर्म वातावरण के प्रति अनुकूलित होते हैं, जैसे ऊँट, छिपकलियाँ और कुछ कीड़े।
टुंड्रा वनस्पति (Tundra Vegetation)
यह वनस्पति अत्यंत ठंडे प्रदेशों में पाई जाती है।
टुंड्रा वनस्पति उन क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ अत्यंत ठंडी जलवायु होती है, विशेषकर उच्च अक्षांशों (जैसे 66° उत्तरी अक्षांश के पास) और ऊँचे पर्वतों पर। यहाँ तापमान हिमांक बिंदु से नीचे रहता है।
यहाँ केवल काई, लाइकेन और छोटी झाड़ियाँ मिलती हैं।
टुंड्रा क्षेत्रों में केवल सीमित प्रकार की वनस्पति ही उग पाती है, जिसमें काई (Mosses), लाइकेन (Lichens), और छोटी झाड़ियाँ (Low shrubs) प्रमुख हैं। यहाँ बड़े वृक्ष नहीं पाए जाते।
इसे अल्पाइन वनस्पति भी कहते हैं।
टुंड्रा वनस्पति को कभी-कभी अल्पाइन वनस्पति (Alpine Vegetation) भी कहा जाता है, खासकर जब यह ऊँचे पर्वतों पर पाई जाती है। यह अत्यंत विषम परिस्थितियों में पनपती है।
यहां पाए जाने वाले जीव कस्तूरी बैल, ध्रुवीय भालू, लोमड़ी हैं।
टुंड्रा प्रदेशों में पाए जाने वाले वन्यजीवों में कस्तूरी बैल (Musk Ox), ध्रुवीय भालू (Polar Bear), आर्कटिक लोमड़ी (Arctic Fox), बारहसिंगा (Reindeer) और सील (Seal) जैसे जीव शामिल हैं। ये जीव ठंडे मौसम से बचने के लिए अनुकूलित होते हैं।
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